नई सरकार के आते ही बदली योजना: 100 साल पुरानी कॉलोनी के 266 मकान तोड़े गए, 5 साल से खाली पड़ी है 33 एकड़ जमीन

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रायपुर में 100 साल पुरानी कॉलोनी के 266 मकान तोड़ दिए गए, लेकिन योजना बदलने से 33 एकड़ जमीन पांच साल से खाली पड़ी है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शहरी विकास से जुड़ा एक बड़ा और विवादित मामला एक बार फिर चर्चा में है। नई सरकार के गठन के बाद एक पुरानी विकास योजना को बदल दिया गया, जिसके चलते करीब 100 साल पुरानी कॉलोनी के 266 मकानों को तोड़ दिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पांच साल बीत जाने के बाद भी 33 एकड़ की यह जमीन आज तक खाली पड़ी है

इस पूरे मामले ने सरकार की योजना, प्रशासनिक निर्णयों और विस्थापित परिवारों की परेशानियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

100 साल पुरानी कॉलोनी, एक झटके में उजाड़ दी गई

जानकारी के अनुसार यह कॉलोनी अंग्रेजों के दौर की बताई जाती है, जहां पीढ़ियों से लोग निवास कर रहे थे। सरकार द्वारा बड़े प्रोजेक्ट की योजना बनाकर—

  • 266 आवासीय मकानों को
  • चरणबद्ध तरीके से
  • मुआवजा और पुनर्वास के वादों के साथ

तोड़ा गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें बेहतर भविष्य का सपना दिखाया गया, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट निकली।

योजना बदली, लेकिन जमीन आज भी खाली

पूर्व सरकार के समय जिस प्रोजेक्ट के लिए यह जमीन खाली कराई गई थी, नई सरकार आते ही उस योजना को बदल दिया गया। नतीजा यह हुआ कि—

  • निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ
  • नई योजना को मंजूरी नहीं मिली
  • और जमीन 5 साल से यूं ही पड़ी है

स्थानीय लोग इसे प्रशासनिक विफलता और संसाधनों की बर्बादी बता रहे हैं।

विस्थापित परिवार आज भी परेशान

कॉलोनी से हटाए गए कई परिवार—

  • किराए के मकानों में रह रहे हैं
  • मुआवजे को अपर्याप्त बता रहे हैं
  • पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं

उनका कहना है कि सरकार ने मकान तोड़ने में तो तेजी दिखाई, लेकिन बसाने की जिम्मेदारी भूल गई।

क्या था मूल प्रोजेक्ट?

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक—

  • यहां बड़े आवासीय या व्यावसायिक प्रोजेक्ट
  • सरकारी कार्यालय
  • या स्मार्ट सिटी से जुड़ी योजना

लाने की तैयारी थी। लेकिन राजनीतिक बदलाव के बाद प्राथमिकताएं बदल गईं और पूरा प्रोजेक्ट अधर में लटक गया।

विपक्ष का हमला

इस मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि—

  • बिना ठोस योजना के मकान तोड़े गए
  • जनता को बेघर किया गया
  • और अब जमीन को यूं ही छोड़ दिया गया

यह जनता के साथ धोखा है।

प्रशासन का पक्ष

प्रशासन का कहना है कि—

  • नई योजना पर विचार चल रहा है
  • भूमि उपयोग को लेकर विभागीय मंथन जारी है
  • जल्द ही नई परियोजना को मंजूरी दी जाएगी

हालांकि, समयसीमा को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया है।

शहरी विकास पर सवाल

शहरी विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • बिना दीर्घकालिक योजना के
  • राजनीतिक बदलाव के साथ योजनाएं बदलना
  • और जनता को उसका खामियाजा भुगतने देना

शहरी विकास के लिए घातक है।

जनता की मांग

स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि—

  • जमीन का शीघ्र उपयोग हो
  • विस्थापितों को प्राथमिकता दी जाए
  • या उन्हें उचित पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए

भविष्य में क्या?

अब देखना यह है कि—

  • सरकार इस जमीन पर कब फैसला लेती है
  • क्या विस्थापित परिवारों को न्याय मिलेगा
  • या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा
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