छत्तीसगढ़ में 4.50 लाख सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल से स्कूल और दफ्तर 31 दिसंबर तक बंद, प्रशासनिक कामकाज ठप और जनता परेशान।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों की व्यापक हड़ताल ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्यभर में करीब 4.50 लाख सरकारी कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिसके चलते स्कूल, सरकारी दफ्तर और कई जरूरी सेवाएं 31 दिसंबर तक पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहने की संभावना है। हड़ताल के कारण प्रशासनिक कामकाज ठप पड़ गया है और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित
हड़ताल का सीधा असर सरकारी स्कूलों पर पड़ा है। शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होने से कई जिलों में स्कूलों में ताले लटके हुए हैं। जहां कुछ जगहों पर स्कूल खुले हैं, वहां उपस्थिति बेहद कम है। परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र और उनके अभिभावक सबसे अधिक परेशान नजर आ रहे हैं।
सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा
राज्य के अधिकांश विभागों में कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण दफ्तरों में कुर्सियां खाली पड़ी हैं। राजस्व, शिक्षा, पंचायत, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन, खाद्य विभाग सहित कई विभागों के काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पेंशन, वेतन और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े काम अटके हुए हैं।
11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
शासकीय कर्मचारी संघों ने 11 प्रमुख मांगों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया है। प्रमुख मांगों में—
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
- वेतन विसंगतियों का निराकरण
- महंगाई भत्ते की दरों में बढ़ोतरी
- समय पर पदोन्नति
- रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती
- संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण
शामिल हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार ने बार-बार आश्वासन दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
बिलासपुर में स्थिति गंभीर
बिलासपुर संभाग में हड़ताल का असर और भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। कलेक्ट्रेट, तहसील कार्यालय, नगर निगम और स्कूलों में कामकाज लगभग पूरी तरह ठप है। दूर-दराज से आए ग्रामीण नागरिक अपने काम के लिए घंटों इंतजार कर निराश होकर लौट रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर
हालांकि आपातकालीन सेवाएं चालू हैं, लेकिन नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल में शामिल होने से ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कई अस्पतालों में मरीजों को जांच और दवाइयों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था
सरकार और जिला प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को तैनात किया गया है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या कम होने से कामकाज सामान्य नहीं हो पा रहा है।
कर्मचारियों का सरकार पर आरोप
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह हड़ताल मजबूरी में की जा रही है। उनका आरोप है कि सरकार कर्मचारी हितों की अनदेखी कर रही है। संघों ने साफ किया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
अभिभावकों और नागरिकों की बढ़ी चिंता
स्कूल बंद होने से अभिभावकों में चिंता है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं सरकारी कामकाज ठप होने से आम लोगों को प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन और अन्य योजनाओं से जुड़े कामों में परेशानी उठानी पड़ रही है।
31 दिसंबर तक जारी रह सकती है हड़ताल
कर्मचारी संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने जल्द बातचीत नहीं की, तो हड़ताल 31 दिसंबर तक और आगे भी जारी रह सकती है। इससे राज्य में प्रशासनिक संकट और गहराने की आशंका है।
सरकार की अपील
सरकार की ओर से कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की गई है और बातचीत के संकेत भी दिए गए हैं। हालांकि अब तक किसी ठोस समाधान की घोषणा नहीं हुई है।
आम जनता पर दोहरी मार
एक ओर शीतकालीन मौसम और वर्ष के अंतिम दिनों में जरूरी कामों की अधिकता, दूसरी ओर सरकारी दफ्तरों की बंदी—इस दोहरी मार से आम जनता परेशान है। लोगों को उम्मीद है कि सरकार और कर्मचारी संगठन जल्द समाधान निकालेंगे।

