छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारी 3 दिन की हड़ताल पर, दफ्तरों में कामकाज ठप, पुरानी पेंशन समेत 11 मांगों को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज से शासकीय कर्मचारी तीन दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के पहले ही दिन प्रदेश भर के सरकारी दफ्तरों में कुर्सियां खाली नजर आईं और कामकाज लगभग ठप हो गया। मंत्रालय, कलेक्ट्रेट, तहसील कार्यालय, विकासखंड कार्यालय, नगर निगम, पंचायत कार्यालय समेत अधिकांश सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति साफ दिखाई दी। कर्मचारी संगठनों के अनुसार यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। राजस्व, पंचायत, नगरीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य प्रशासन, महिला एवं बाल विकास, सहकारिता सहित कई विभागों में फाइलों का काम रुक गया है। प्रमाण पत्र, पेंशन, नामांतरण, भुगतान, योजनाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हुए हैं।
क्यों हड़ताल पर गए कर्मचारी?
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन और अन्य संगठनों के आह्वान पर यह हड़ताल बुलाई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। कई मुद्दों पर बार-बार ज्ञापन देने और वार्ता के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता गया।
प्रदेशभर में प्रदर्शन
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, कोरबा, अंबिकापुर, जगदलपुर सहित सभी जिलों में कर्मचारियों ने कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। राजधानी रायपुर में कर्मचारी बड़ी संख्या में इंद्रावती भवन और कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन सरकार की उदासीनता जारी रही तो आगे चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
ये हैं कर्मचारियों की 11 प्रमुख मांगें
शासकीय कर्मचारियों ने सरकार के समक्ष 11 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें—
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूर्ण बहाली
- चार स्तरीय वेतनमान की विसंगतियों का निराकरण
- महंगाई भत्ते (DA) की बकाया किश्तों का भुगतान
- अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया को सरल करना
- समयमान और पदोन्नति में हो रही देरी को खत्म करना
- संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण
- कर्मचारियों के स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर ग्रेच्युटी और पेंशन
- शिक्षक एवं स्वास्थ्य कर्मियों के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती
- सरकारी कर्मचारियों पर लंबित विभागीय मामलों का शीघ्र निपटारा
- कर्मचारी संगठनों से नियमित संवाद और वार्ता की व्यवस्था
आम जनता पर असर
हड़ताल के कारण आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तहसील कार्यालयों में—
- जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र
- नामांतरण और सीमांकन
- पेंशन और सामाजिक योजनाओं से जुड़े कार्य
पूरी तरह ठप हैं। नगर निगम और पंचायत कार्यालयों में टैक्स, भुगतान और शिकायत निवारण प्रभावित हुआ है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी असर
हालांकि आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से अलग रखा गया है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए हैं। अस्पतालों में रिकॉर्ड, भुगतान और स्टाफ से जुड़े काम रुके हुए हैं। वहीं शिक्षा विभाग में भी कार्यालयीन कार्य और योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।
सरकार की तैयारी और प्रतिक्रिया
सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार उच्च स्तर पर कर्मचारियों से वार्ता की तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं को सुचारू रखने के निर्देश जारी किए हैं और जिलों को सतर्क रहने को कहा गया है।
कर्मचारी नेताओं का कहना
कर्मचारी फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह हड़ताल किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि कर्मचारियों के हक और सम्मान के लिए की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
आगे क्या?
यदि तीन दिन की हड़ताल के बाद भी सरकार और कर्मचारियों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल और राजधानी में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है। इससे आने वाले दिनों में प्रशासनिक व्यवस्था पर और दबाव बढ़ सकता है।

