रायपुर में 6 महीने में 13 पैडलर्स ग्रुप के 53 आरोपी गिरफ्तार, नशा तस्कर खुद ग्राहकों से संपर्क कर नया नेटवर्क खड़ा कर रहे हैं।
रायपुर। राजधानी रायपुर में नशे के कारोबार ने अब नए और ज्यादा संगठित रूप ले लिए हैं। पुलिस की सख्त कार्रवाई के बावजूद पैडलर्स (नशा तस्कर) नए-नए तरीके अपनाकर नशे का नेटवर्क फैलाने में जुटे हैं। पिछले 6 महीनों में रायपुर पुलिस ने 13 अलग-अलग पैडलर्स ग्रुप का भंडाफोड़ करते हुए 53 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो नशे के कारोबार को संगठित नेटवर्क के रूप में संचालित कर रहे थे।
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अब पैडलर्स नशा करने वालों का इंतजार नहीं कर रहे, बल्कि खुद ही संभावित ग्राहकों से संपर्क कर उन्हें नशे की लत में धकेलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
सोशल मीडिया और पर्सनल संपर्क बना हथियार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार नशा पैडलर्स अब सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और पर्सनल नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे पहले नशा करने वालों की पहचान करते हैं, फिर उनसे दोस्ती बढ़ाकर धीरे-धीरे सप्लाई शुरू करते हैं।
- व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप
- इंस्टाग्राम और स्नैपचैट
- जिम, पब, ढाबों और कॉलेज इलाकों में संपर्क
इन माध्यमों से पैडलर्स नया ग्राहक तैयार कर रहे हैं।
नया नेटवर्क खड़ा करने की साजिश
पुलिस की जांच में सामने आया है कि कई पैडलर्स केवल खुद सप्लाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे स्तर पर नए लोगों को जोड़कर उन्हें भी पैडलर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह पूरा नेटवर्क चेन सिस्टम की तरह काम कर रहा है।
कुछ मामलों में नशा करने वालों को कम दाम या मुफ्त सैंपल देकर उन्हें पैडलर बनने का लालच दिया गया।
किन नशों की हो रही थी सप्लाई
पिछले छह महीनों में पकड़े गए मामलों में मुख्य रूप से—
- ब्राउन शुगर
- गांजा
- अफीम
- नशीली टैबलेट और सिरप
की अवैध सप्लाई सामने आई है। इनमें से कई मामलों में नशा अन्य राज्यों से रायपुर लाया जा रहा था।
पुलिस की कार्रवाई और रणनीति
रायपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाते हुए—
- सिविल ड्रेस में निगरानी
- संदिग्ध इलाकों में पेट्रोलिंग
- तकनीकी सर्विलांस
- कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रैकिंग
जैसे कदम उठाए, जिससे नेटवर्क का खुलासा हो सका।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस अभियान को और सख्त किया जाएगा।
युवाओं को बना रहे निशाना
पुलिस और सामाजिक संगठनों के अनुसार पैडलर्स का मुख्य निशाना युवा वर्ग है। कॉलेज स्टूडेंट्स, बेरोजगार युवक और नाइट शिफ्ट में काम करने वाले युवाओं को खास तौर पर टारगेट किया जा रहा है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया,
“अब नशा तस्करी केवल सप्लाई नहीं, बल्कि एक संगठित भर्ती नेटवर्क बनता जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।”
समाज और अभिभावकों की भूमिका अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से नशे पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। इसके लिए—
- परिवारों की सतर्कता
- स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता
- नशा मुक्ति अभियान
- काउंसलिंग और पुनर्वास केंद्र
जैसे उपाय भी उतने ही जरूरी हैं।
आगे भी जारी रहेगी सख्ती
रायपुर पुलिस ने साफ किया है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पैडलर्स, सप्लायर्स और नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

