छत्तीसगढ़ में नर्सिंग स्टाफ तीन दिवसीय आंदोलन पर, 11 मांगों को लेकर प्रदर्शन से सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज से सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। राज्यभर के नर्सिंग स्टाफ ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर तीन दिवसीय आंदोलन की घोषणा की है। आंदोलन के चलते ओपीडी, वार्ड प्रबंधन, टीकाकरण, आपातकालीन सेवाओं के अलावा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नर्सिंग संघों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
राजधानी रायपुर से शुरू हुआ आंदोलन
राजधानी रायपुर में नर्सिंग स्टाफ ने स्वास्थ्य विभाग कार्यालय और अस्पताल परिसरों में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदेश के सभी जिलों में नर्सों ने काली पट्टी बांधकर काम करने, सामूहिक अवकाश और चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि यदि सरकार ने तीन दिनों के भीतर मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
11 सूत्रीय प्रमुख मांगें
नर्सिंग स्टाफ की प्रमुख मांगों में—
- नियमितीकरण और पदोन्नति की स्पष्ट नीति
- वेतन विसंगतियों को दूर करना
- जोखिम भत्ता एवं विशेष प्रोत्साहन राशि
- नाइट ड्यूटी और ओवरटाइम का भुगतान
- रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती
- कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था
- स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता
- संविदा कर्मियों को समान वेतन
- प्रशिक्षण और करियर ग्रोथ
- स्वास्थ्य बीमा सुविधाएं
- कार्यभार के अनुपात में स्टाफ की नियुक्ति
शामिल हैं।
मरीजों को हो सकती है परेशानी
तीन दिवसीय आंदोलन के चलते अस्पतालों में मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और जिला अस्पतालों में इलाज की गति धीमी होने की आशंका है। हालांकि नर्सिंग संघों ने दावा किया है कि आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन सीमित स्टाफ के कारण सेवाएं प्रभावित होंगी।
सरकार से संवाद की अपील
नर्सिंग संघ के नेताओं ने कहा कि वे टकराव नहीं चाहते, बल्कि संवाद के जरिए समाधान चाहते हैं। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल वार्ता कर मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
संघ का कहना है कि कोविड काल से लेकर अब तक नर्सिंग स्टाफ ने विपरीत परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा से काम किया है, लेकिन बदले में उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ की मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। कुछ मांगें नीति और बजट से जुड़ी हैं, जिन पर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है। विभाग ने आंदोलन के दौरान आवश्यक सेवाएं बनाए रखने के निर्देश भी जारी किए हैं।
विपक्ष का सरकार पर हमला
नर्सिंग स्टाफ के आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य कर्मियों की अनदेखी कर रही है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
आगे की रणनीति
यदि तीन दिनों के भीतर समाधान नहीं निकला, तो नर्सिंग संघ राज्यव्यापी हड़ताल, कार्य बहिष्कार और राजधानी घेराव जैसे कदम उठा सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित होने की संभावना है।
आम जनता से अपील
नर्सिंग स्टाफ ने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि उनका आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए है।

