कांगेर घाटी को विश्व धरोहर बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में, फरवरी में यूनेस्को का फैसला, छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर को मिल सकती है वैश्विक पहचान।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। लंबे समय से चल रही इस कवायद ने हाल के महीनों में रफ्तार पकड़ी है और फरवरी में इस पर अंतिम फैसला होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो कांगेर घाटी छत्तीसगढ़ की पहली प्राकृतिक विश्व धरोहर बन जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी कांगेर घाटी की पहचान
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता, अद्भुत गुफाओं, दुर्लभ वन्य जीवों और घने वनों के लिए जाना जाता है। यहां स्थित कुटुमसर, कैलाश और दंडक गुफाएं, हरे-भरे साल और सागौन के जंगल, तथा कई दुर्लभ प्रजातियों के वनस्पति और जीव इसे वैश्विक स्तर पर विशिष्ट बनाते हैं।
इसी विशिष्टता को आधार बनाकर राज्य सरकार और वन विभाग ने कांगेर घाटी को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है।
फरवरी में होगी निर्णायक बैठक
सूत्रों के अनुसार, यूनेस्को की तकनीकी समिति की बैठक फरवरी में प्रस्तावित है, जिसमें भारत से भेजे गए विभिन्न स्थलों पर विचार किया जाएगा। कांगेर घाटी को लेकर विशेषज्ञों की रिपोर्ट, जैव विविधता का आकलन और संरक्षण योजना पहले ही प्रस्तुत की जा चुकी है।
यदि समिति की सिफारिश सकारात्मक रहती है, तो कांगेर घाटी को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलना तय माना जा रहा है।
राज्य सरकार और वन विभाग की तैयारी
कांगेर घाटी को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में संरक्षण, इको-टूरिज्म और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया है।
- अवैध कटाई और शिकार पर सख्त नियंत्रण
- स्थानीय जनजातियों की सहभागिता
- पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विकास
- वैज्ञानिक शोध और दस्तावेजीकरण
इन सभी पहलुओं को यूनेस्को के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
यदि कांगेर घाटी को विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है, तो इससे पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। देश-विदेश से पर्यटक यहां आकर्षित होंगे, जिससे बस्तर अंचल में—
- स्थानीय युवाओं को रोजगार
- होम-स्टे और गाइड सेवाओं का विस्तार
- हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को नया बाजार
- क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती
जैसे कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे।
संरक्षण के साथ विकास पर रहेगा जोर
विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद संरक्षण की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाएगी। यूनेस्को के दिशा-निर्देशों के अनुसार विकास कार्य पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए किए जाएंगे, ताकि कांगेर घाटी की प्राकृतिक संरचना को कोई नुकसान न पहुंचे।
जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
पर्यावरणविदों और जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि कांगेर घाटी न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर है और इसे वैश्विक पहचान मिलना गर्व की बात होगी।
बस्तर के लिए मील का पत्थर
कांगेर घाटी को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से बस्तर क्षेत्र की पहचान केवल नक्सल प्रभावित इलाके के रूप में नहीं, बल्कि प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र के रूप में स्थापित होगी।
अब सबकी निगाहें फरवरी में होने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो छत्तीसगढ़ के पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ सकता है।

