रायपुर में शिक्षक युक्तियुक्तकरण के छह माह बाद भी ज्वाइनिंग अधूरी, कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित, अभिभावक और शिक्षक संगठन चिंतित।
रायपुर। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में लागू किए गए शिक्षक युक्तियुक्तकरण (Rationalization) की प्रक्रिया अब शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि युक्तियुक्तकरण आदेश जारी हुए छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षक अब तक अपने नए पदस्थापन स्थल पर ज्वाइन नहीं कर पाए हैं। इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी, कक्षाएं प्रभावित
युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण करना था, ताकि जहां शिक्षक अधिक हैं वहां से जरूरतमंद स्कूलों में भेजा जा सके। लेकिन व्यवहार में यह योजना उलझकर रह गई है। कई स्कूल ऐसे हैं जहां से शिक्षक स्थानांतरित कर दिए गए, लेकिन नए शिक्षक अब तक पहुंचे ही नहीं।
ग्रामीण और शहरी सीमावर्ती इलाकों के स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। कहीं प्रधान पाठक पढ़ा रहे हैं, तो कहीं अतिथि शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई चल रही है।
छह माह बाद भी ज्वाइनिंग अधूरी
शिक्षा विभाग के आदेशों के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों की ज्वाइनिंग प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसकी प्रमुख वजहों में प्रशासनिक देरी, आपत्तियों का निराकरण न होना और स्थानांतरण को लेकर विवाद शामिल हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि कई मामलों में युक्तियुक्तकरण सूची में त्रुटियां हैं। कहीं विषय विशेषज्ञ को ऐसे स्कूल में भेज दिया गया है जहां उसकी जरूरत नहीं, तो कहीं विषय ही नहीं है।
बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर
शिक्षकों की कमी का सबसे बड़ा खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। कई स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं। परीक्षा नजदीक होने के बावजूद सिलेबस अधूरा है, जिससे अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है।
अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पहले ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, ऊपर से शिक्षकों की अनुपस्थिति ने हालात और खराब कर दिए हैं।
शिक्षक संगठनों में नाराजगी
शिक्षक संघों ने युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को अव्यवस्थित और जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया है। उनका कहना है कि बिना जमीनी सर्वे और वास्तविक जरूरतों का आकलन किए हुए सूची जारी कर दी गई, जिसका नतीजा आज स्कूलों में अव्यवस्था के रूप में सामने आ रहा है।
संघों ने मांग की है कि जब तक सभी आपत्तियों का निराकरण न हो जाए और ज्वाइनिंग प्रक्रिया पूरी न हो, तब तक बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
शिक्षा विभाग की सफाई
शिक्षा विभाग का कहना है कि युक्तियुक्तकरण एक सतत प्रक्रिया है और धीरे-धीरे सभी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिन शिक्षकों की ज्वाइनिंग बाकी है, उनके मामलों की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही स्थिति सामान्य होगी।
हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि सत्र के महत्वपूर्ण महीने निकल चुके हैं और अब तक कई स्कूल शिक्षकविहीन हैं।
भविष्य पर सवाल
शिक्षाविदों का मानना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर बोर्ड परीक्षा परिणामों और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ेगा। युक्तियुक्तकरण जैसे बड़े फैसले को लागू करते समय बच्चों के हित को सर्वोपरि रखना जरूरी है।

