छत्तीसगढ़ में गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा समाप्त, गृहमंत्री के फैसले के बाद अब मंत्री और पुलिस अधिकारियों को औपचारिक सलामी नहीं दी जाएगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक और प्रोटोकॉल व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करते हुए गार्ड ऑफ ऑनर की पुरानी परंपरा को समाप्त कर दिया है। राज्य के गृहमंत्री के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है, जिसके तहत अब मंत्रियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य पदाधिकारियों को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा।
सरकार के इस फैसले को सादगी, समानता और प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
क्यों लिया गया यह फैसला
गृह विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार—
- गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा औपनिवेशिक दौर की मानी जाती है
- इससे पुलिस बल और संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है
- आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच दूरी का भाव बनता है
इन्हीं कारणों से गृहमंत्री ने इस व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया।
किन्हें नहीं मिलेगा अब गार्ड ऑफ ऑनर
नए निर्देशों के अनुसार अब—
- राज्य के मंत्री
- वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
- प्रशासनिक अधिकारी
- दौरे पर आए जनप्रतिनिधि
को किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम, निरीक्षण या आगमन पर गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा।
हालांकि, राष्ट्रीय पर्वों, शहीद सम्मान और संवैधानिक आवश्यकताओं से जुड़े विशेष अवसरों पर यह व्यवस्था लागू रह सकती है।
पुलिस बल को मिलेगा राहत
इस फैसले से—
- पुलिस जवानों को अनावश्यक ड्यूटी से राहत मिलेगी
- बल का उपयोग कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा में बेहतर ढंग से हो सकेगा
- औपचारिकताओं की बजाय वास्तविक कार्यों पर फोकस बढ़ेगा
पुलिस विभाग के कई अधिकारियों ने इसे व्यावहारिक और समयानुकूल निर्णय बताया है।
सादगी और समानता का संदेश
राज्य सरकार का कहना है कि—
- लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं
- अनावश्यक प्रोटोकॉल लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं
- यह निर्णय प्रशासन को जनता के और करीब लाएगा
इस बदलाव से सरकारी कार्यक्रमों में भी सादगी देखने को मिलेगी।
पहले कैसे होती थी व्यवस्था
अब तक—
- मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के आगमन पर
- पुलिस की टुकड़ी द्वारा सलामी दी जाती थी
- इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था करनी पड़ती थी
जिससे आम लोगों को असुविधा होती थी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
सरकार के इस निर्णय पर—
- कई सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है
- इसे खर्च और दिखावे में कटौती का कदम बताया गया है
वहीं कुछ लोगों का मानना है कि—
- परंपराओं को पूरी तरह समाप्त करने की बजाय
- उनमें सुधार किया जाना चाहिए था
हालांकि सरकार अपने फैसले पर दृढ़ नजर आ रही है।
प्रशासनिक सुधार की कड़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- यह फैसला प्रशासनिक सुधारों की एक कड़ी है
- भविष्य में अन्य प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं में भी बदलाव संभव है
- इससे सरकारी कामकाज अधिक सरल और जनोन्मुखी बनेगा
आगे क्या रहेगा लागू
गृह विभाग द्वारा जल्द ही—
- सभी जिलों को लिखित निर्देश जारी किए जाएंगे
- पुलिस मुख्यालय स्तर पर नई गाइडलाइन लागू होगी
- किसी भी उल्लंघन पर जवाबदेही तय की जाएगी

