शहरों में पीएम आवास योजना पर ब्रेक: नए मकान नहीं बनेंगे, 49 हजार से अधिक अधूरे घरों पर संकट

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छह दिन में पूरे नहीं हुए तो रुकेगा भुगतान, हितग्राहियों और ठेकेदारों में चिंता

रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के शहरों में नए मकानों के निर्माण पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। राज्य सरकार और केंद्र की ओर से साफ निर्देश जारी किए गए हैं कि जब तक पहले से स्वीकृत 49 हजार से अधिक अधूरे मकान पूरे नहीं होते, तब तक किसी भी नए आवास को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

इसके साथ ही प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि छह दिन की समयसीमा में यदि अधूरे मकान पूरे नहीं किए गए, तो संबंधित हितग्राहियों को अगली किस्त की राशि नहीं मिलेगी


49 हजार से ज्यादा मकान अब भी अधूरे

राज्य के शहरी निकायों से मिली जानकारी के अनुसार—

  • पीएम आवास योजना (Urban) के तहत
  • अलग-अलग शहरों में 49,000 से अधिक मकान अधूरे हैं
  • कई मकान वर्षों से निर्माण की विभिन्न अवस्थाओं में अटके हुए हैं

इन अधूरे निर्माणों के चलते योजना की प्रगति पर सवाल उठ रहे थे, जिसके बाद यह सख्त फैसला लिया गया।


नए आवासों की मंजूरी पर रोक

सरकार का मानना है कि—

  • पहले से स्वीकृत मकानों को पूरा किए बिना
  • नए प्रोजेक्ट शुरू करना संसाधनों की बर्बादी है

इसी वजह से अब शहरी क्षेत्रों में पीएम आवास के नए आवेदन और निर्माण प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है


छह दिन का अल्टीमेटम

नगर निगमों और आवास विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि—

  • अधूरे मकानों की तत्काल समीक्षा की जाए
  • निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराया जाए
  • छह दिन के भीतर प्रगति रिपोर्ट भेजी जाए

यदि तय समयसीमा में मकान पूर्ण नहीं हुए, तो—

  • अगली किस्त रोकी जाएगी
  • संबंधित ठेकेदारों और हितग्राहियों पर कार्रवाई भी संभव है

किन कारणों से अधूरे रह गए मकान

अधिकारियों के मुताबिक, अधूरे मकानों के पीछे कई कारण हैं—

  • हितग्राहियों द्वारा निर्माण में लापरवाही
  • ठेकेदारों की धीमी कार्यप्रणाली
  • सामग्री की कमी
  • मजदूरों की अनुपलब्धता
  • कुछ मामलों में हितग्राही द्वारा राशि का अन्यत्र उपयोग

हितग्राहियों में बढ़ी चिंता

अचानक आए इस फैसले से—

  • गरीब और मध्यम वर्ग के हितग्राही
  • निर्माण एजेंसियां
  • स्थानीय ठेकेदार

सभी चिंता में हैं। कई लोगों का कहना है कि छह दिन में मकान पूरा कर पाना व्यावहारिक नहीं है, खासकर जहां निर्माण प्रारंभिक स्तर पर है।


प्रशासन का पक्ष

आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि—

  • योजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है
  • लंबे समय से अधूरे मकानों से योजना की साख प्रभावित हो रही है
  • सख्ती के बिना लक्ष्य हासिल नहीं हो सकता

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में वास्तविक कारणों से देरी हुई है, वहां स्थिति की समीक्षा के बाद राहत दी जा सकती है।


शहरी निकायों पर बढ़ी जिम्मेदारी

नगर निगम और नगर पालिकाओं को निर्देश दिए गए हैं कि—

  • वे रोजाना निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग करें
  • जियो टैगिंग और फोटो अपलोड अनिवार्य कराएं
  • प्रगति रिपोर्ट सीधे राज्य मुख्यालय भेजें

विपक्ष ने उठाए सवाल

इस फैसले पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाते हुए कहा है कि—

  • सरकार पहले व्यवस्था सुधारने में विफल रही
  • अब उसका खामियाजा गरीब हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है

उन्होंने छह दिन की समयसीमा को अव्यवहारिक बताया है।


आगे क्या?

फिलहाल सरकार का फोकस—

  • अधूरे मकानों को जल्द से जल्द पूरा कराने पर
  • इसके बाद ही नए आवासों की मंजूरी पर विचार किया जाएगा

यदि समयसीमा में लक्ष्य पूरा नहीं होता है, तो योजना में और सख्ती संभव है।

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