उद्यानिकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों से किसान और युवा आधुनिक तकनीक अपनाकर आय बढ़ा रहे हैं, जिससे स्वरोजगार, कृषि विविधीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।
रायपुर। राज्य सरकार द्वारा संचालित उद्यानिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहे हैं। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और बाजारोन्मुख उत्पादन पर आधारित ये प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों और युवाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार के लिए भी सक्षम बना रहे हैं।
उद्यानिकी विभाग के माध्यम से फल, सब्जी, मसाला, फूल उत्पादन और नर्सरी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उन्नत बीज, पौधरोपण तकनीक, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, जैविक खेती और कीट-रोग प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, परंपरागत खेती की तुलना में उद्यानिकी फसलों से कम समय में अधिक आय अर्जित की जा सकती है। यही कारण है कि युवा वर्ग भी अब इस क्षेत्र में रुचि दिखा रहा है। प्रशिक्षण के बाद कई युवाओं ने सब्जी उत्पादन, फल बागवानी और नर्सरी व्यवसाय शुरू किया है।
किसानों का कहना है कि प्रशिक्षण से उन्हें खेती के नए तरीके सीखने का अवसर मिला है। वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने से उत्पादन बढ़ा है और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है, जिससे बाजार में बेहतर दाम मिल रहे हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं, अनुदान और तकनीकी सहायता की जानकारी भी दी जा रही है। इससे वे योजना का लाभ लेकर उद्यानिकी को व्यवसाय के रूप में विकसित कर पा रहे हैं।
उद्यानिकी विभाग ने बताया कि प्रशिक्षण के साथ-साथ किसानों को फील्ड डेमोंस्ट्रेशन, भ्रमण और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि टिकाऊ और लाभकारी खेती को बढ़ावा देना है।
युवाओं के लिए यह प्रशिक्षण रोजगार का नया विकल्प बन रहा है। स्वरोजगार के माध्यम से वे न केवल स्वयं की आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित कर रहे हैं।
उद्यानिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में कृषि विविधीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। इससे किसान और युवा दोनों सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।

