रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब डीजीपी स्तर के अधिकारी होंगे एसीबी प्रमुख।
छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) के प्रमुख पदों पर अब महानिदेशक (डीजीपी) स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय लिया है। इससे पहले इन एजेंसियों का नेतृत्व महानिरीक्षक (आईजी) स्तर के अधिकारी करते थे। सरकार ने इस बदलाव को लागू करने के लिए आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है।
एसीबी और ईओडब्ल्यू की भूमिका
एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा राज्य में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और वित्तीय अनियमितताओं जैसे मामलों की जांच करती हैं। इन एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। वर्तमान में रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा इन एजेंसियों के प्रभारी हैं।
सुकमा में एसीबी-ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई
इसी बीच, एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीमों ने सुकमा जिले में एक बड़े छापेमारी अभियान की शुरुआत की है। यह कार्रवाई पूर्व विधायक और सीपीआई नेता मनीष कुंजाम के ठिकानों समेत तेंदूपत्ता प्रबंधकों के घरों पर की गई। नक्सल प्रभावित इस जिले में पहली बार इस स्तर की छापेमारी हुई है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई सुबह से ही विभिन्न स्थानों पर की जा रही है, जिसमें कुंजाम के रिश्तेदारों के घर भी शामिल हैं।
पिछले घटनाक्रम और प्रशासनिक बदलाव
पिछले वर्षों में एसीबी और ईओडब्ल्यू के संचालन में कई महत्वपूर्ण बदलाव और घटनाएं हुई हैं। उदाहरण के लिए, मार्च 2024 में, भाजपा सरकार ने एसीबी और ईओडब्ल्यू में 32 अधिकारियों और पुलिसकर्मियों का तबादला किया था, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया था। इन तबादलों का उद्देश्य एजेंसियों की कार्यक्षमता में सुधार करना था।
इसके अलावा, अप्रैल 2023 में, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डीएम अवस्थी को एसीबी/ईओडब्ल्यू के पुलिस महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। अवस्थी ने मार्च 2023 में इसी पद से सेवानिवृत्ति ली थी, और सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद उन्हें विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) के रूप में नियुक्त किया गया था।
भविष्य की दिशा
सरकार के इस नए निर्णय से एसीबी और ईओडब्ल्यू की कार्यक्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है। महानिदेशक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में इन एजेंसियों को अधिक अनुभव और प्रशासनिक क्षमता मिलेगी, जिससे भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों के खिलाफ लड़ाई में मजबूती आएगी। साथ ही, यह बदलाव राज्य में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों की संरचना और संचालन में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। इससे न केवल इन एजेंसियों की कार्यक्षमता में सुधार होगा, बल्कि राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। नागरिकों को उम्मीद है कि इस बदलाव से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में तेजी आएगी और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।

