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छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: चावल निर्यातकों को मंडी शुल्क में छूट

📑 इस लेख मेंरायपुर। मंडी शुल्कछूट का उद्देश्यअधिसूचना और शर्तेंचावल उद्योग को मिलेगा बढ़ावाराज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को लाभराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धासमाप्तिagriculture, cg news, raipur news,…

📅 2 January 2025, 2:02 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर। मंडी शुल्क

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के चावल उद्योग और किसानों के हित में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए चावल निर्यातकों को मंडी शुल्क और कृषक कल्याण शुल्क में पूर्णतः छूट देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर लिया गया यह निर्णय राज्य से गैर-बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा देने और इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।

छूट का उद्देश्य

सरकार का यह कदम छत्तीसगढ़ के चावल उद्योग, किसानों और राइस मिलर्स को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से उठाया गया है। राज्य के राइस मिलर्स और मंडियों के माध्यम से खरीदे गए धान से तैयार गैर-बासमती चावल का निर्यात करने वाले निर्यातकों को इस छूट का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय राज्य के चावल उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम से राज्य के किसानों और राइस मिलर्स को अधिक लाभ मिलेगा और उन्हें वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलेगा।

अधिसूचना और शर्तें

राज्य सरकार द्वारा मंडी शुल्क और कृषक कल्याण शुल्क में छूट की अधिसूचना को राजपत्र में प्रकाशन के लिए जारी कर दिया गया है। यह छूट अधिसूचना प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष तक के लिए प्रभावी रहेगी। छूट का लाभ उठाने के लिए चावल निर्यातकों को निम्नलिखित शर्तों का पालन करना होगा:

  1. मूल स्थान की पहचान: चावल के शिपिंग बिल में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख होना चाहिए कि चावल का मूल स्थान छत्तीसगढ़ है।
  2. दस्तावेजी प्रमाण: निर्यातकों को वस्तु एवं सेवा कर (GST) विवरण, लदान बिल, और बैंक री-कॉसिलेशन स्टेटमेंट की प्रति संबंधित मंडी में प्रस्तुत करनी होगी।
  3. घोषणा पत्र: राइस मिलर्स और चावल निर्यातकों को यह घोषणा पत्र देना होगा कि चावल छत्तीसगढ़ से खरीदे गए धान से तैयार किया गया है।
  4. परमिट की आवश्यकता: राइस मिलर्स को मंडी अधिनियम के तहत चावल निर्यातकों को परमिट जारी करना होगा।

चावल उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

छत्तीसगढ़ सरकार के इस निर्णय से न केवल राज्य के चावल उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि यह निर्णय चावल उत्पादकों और मिलर्स के लिए आर्थिक समृद्धि के द्वार भी खोलेगा। इससे राज्य के गैर-बासमती चावल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा का मौका मिलेगा।

चावल निर्यातकों और मिलर्स ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने इसे उद्योग के लिए एक सकारात्मक बदलाव बताते हुए कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के चावल को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी।

राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को लाभ

छत्तीसगढ़ मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां धान की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। राज्य के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार का यह निर्णय अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा

सरकार का मानना है कि मंडी शुल्क और कृषक कल्याण शुल्क में छूट देने से राज्य के चावल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। कम लागत के चलते राज्य के चावल निर्यातकों को अन्य राज्यों और देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रखा जा सकेगा।

समाप्ति

छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों व चावल उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को आर्थिक लाभ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार ने आशा व्यक्त की है कि इस पहल से छत्तीसगढ़ के चावल निर्यात को नई दिशा मिलेगी और राज्य का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक सशक्त होगा।

गुरचरण सिंह होरा

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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