रायपुर। आत्मसमर्पण नीति
छत्तीसगढ़ सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति – 2025 के तहत बीजापुर जिले में 28 लाख रुपये के इनामी 9 नक्सलियों समेत कुल 19 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सफलता पर सुरक्षाबलों को बधाई देते हुए कहा कि सरकार बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण और विकसित भविष्य की ओर एक बड़ा कदम बताया।
डबल इंजन सरकार का प्रभाव: नक्सलवाद के खात्मे की ओर कदम
मुख्यमंत्री साय ने आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के पतन की बड़ी शुरुआत बताते हुए कहा, “डबल इंजन की सरकार कैंसर रूपी नक्सलवाद के ताबूत पर आखिरी कील ठोंकने का काम कर रही है।” उन्होंने बताया कि नक्सलवाद के कुचक्र में फंसे लोग अब समाज की मुख्यधारा से जुड़ने को तैयार हैं, जो स्वागतयोग्य है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का पूर्णतः खात्मा तय है।
सरकार की रणनीति बनी आत्मसमर्पण का कारण
राज्य सरकार की सुदूर अंचलों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़क निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से स्थानीय लोगों का सरकार पर विश्वास बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का असर यह है कि नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं और उनके सदस्य मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत हथियार छोड़ने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और पुनरुत्थान का पूरा अवसर दिया जा रहा है।
सुरक्षा बलों की सतर्कता और विकास योजनाओं का असर
मुख्यमंत्री साय ने सुरक्षाबलों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी रणनीतिक कार्रवाई और सरकार की विकास योजनाओं के कारण ही नक्सली समूह कमजोर पड़ रहे हैं।
राज्य सरकार की “नियद नेल्ला नार योजना” के तहत सड़क निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है, जिससे दुर्गम इलाकों में सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ रही है। इससे लोगों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिलने लगी हैं, जो नक्सलवाद से मोहभंग का एक बड़ा कारण बन रहा है।
बस्तर के लिए नया युग
छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर आने वाले समय में और अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौट सकते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हर आत्मसमर्पण बस्तर के सुरक्षित भविष्य की नींव को मजबूत कर रहा है। सरकार और सुरक्षा बल मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि बस्तर जल्द ही नक्सल मुक्त बन सके।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत रोजगार, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से राज्य में शांति और स्थिरता का नया युग शुरू हो रहा है।

