रायपुर। शंखनाद महासत्संग
राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में मंगलवार को आयोजित शंखनाद महासत्संग में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के सान्निध्य में हुए इस भव्य आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी शिरकत की और प्रदेश की सुख-समृद्धि व खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीश्री रविशंकर और उनके संस्थान आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा किए जा रहे परोपकार और मानवता के कल्याण के कार्यों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि श्रीश्री रविशंकर जी योग, ध्यान और आध्यात्मिक upliftment के माध्यम से देश-दुनिया में करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार और आर्ट ऑफ लिविंग के बीच हुआ एमओयू
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार और आर्ट ऑफ लिविंग के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) हुआ है, जिसके तहत प्रदेश में जल संरक्षण, कृषि संवर्धन, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आजीविका और नशामुक्ति के लिए कार्य किया जाएगा। इस समझौते के तहत नया रायपुर में आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी, जिसका शिलान्यास भी कार्यक्रम में किया गया।
उन्होंने कहा कि ध्यान और मेडिटेशन को पुनः स्थापित करने में आर्ट ऑफ लिविंग ने अहम भूमिका निभाई है। सरकार इस प्रयास में पूरा सहयोग देगी ताकि प्रदेश में आध्यात्मिक और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा मिले।
ॐ ध्वनि से गूंज उठा साइंस कॉलेज मैदान
महासत्संग के दौरान जब श्रीश्री रविशंकर ने हजारों श्रद्धालुओं को ध्यान कराया, तो पूरे मैदान में श्रद्धालुओं द्वारा उच्चारित ॐ ध्वनि से वातावरण गुंजायमान हो उठा। इस अद्भुत क्षण ने उपस्थित लोगों को गहरी शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
नक्सल प्रभावित युवाओं से मुख्यधारा में लौटने की अपील
श्रीश्री रविशंकर ने अपने संबोधन में नक्सल विचारधारा से प्रभावित युवाओं से मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने कहा—
“बंदूक से कुछ भी हल नहीं होता। छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, फल-फूल और खनिज संपदा से भरपूर प्रदेश है। अगर हम सब मिलकर विकास की दिशा में आगे बढ़ें, तो यह प्रदेश दुनिया के आकर्षण का केंद्र बन सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि सभी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जरूरी है। हम सभी को मिलकर छत्तीसगढ़ को उत्तम और भारत को श्रेष्ठ बनाना होगा।

आर्ट ऑफ लिविंग के सिद्धांतों पर जोर
श्रीश्री रविशंकर ने अपने प्रवचन में आर्ट ऑफ लिविंग के सिद्धांतों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि—
- जीवन में शक्ति, भक्ति, युक्ति और मुक्ति का संतुलन होना चाहिए।
- विपरीत परिस्थितियों में भी मन का समभाव बनाए रखें।
- दूसरों की प्रेरणा लें, लेकिन पूरी तरह प्रभावित न हों।
- प्रेम का सही अर्थ यह है कि कोई भी हमें गैर न लगे।
उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरु दक्षिणा के रूप में यह वचन मांगा कि वे अपना दुख-दर्द यहीं छोड़कर जाएं और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखें।
भजनों पर झूमा पूरा मैदान, श्रद्धालुओं को दिया आशीर्वाद
कार्यक्रम के अंतिम चरण में जब भजनों की धुन बजी, तो पूरा मैदान भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। श्रीश्री रविशंकर स्वयं रैंप पर चलकर श्रद्धालुओं के बीच पहुंचे और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।

अनेक गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी, विधायक श्री किरण सिंहदेव, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
निष्कर्ष
शंखनाद महासत्संग में आध्यात्मिकता, ध्यान और सामाजिक सुधार के संदेशों का अनूठा संगम देखने को मिला। छत्तीसगढ़ सरकार और आर्ट ऑफ लिविंग का यह सहयोग राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

