रायपुर। चिप्स ने फर्जी प्रमाण पत्र मामले में एफआईआर के निर्देश दिए
छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसाइटी (CHiPS) ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के मामले में मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई कंपनी द्वारा भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) की निविदा में भाग लेने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज जमा करने के आरोपों के बाद की गई है।
चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने रायपुर के सिविल लाइंस थाने में इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए पत्र प्रेषित किया है।
फर्जी प्रमाण पत्र मामले का खुलासा
चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुभव प्रमाण पत्र की जांच की गई। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि चिप्स द्वारा ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया था।
इसके बाद, चिप्स ने पत्राचार के माध्यम से मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड से इस फर्जी दस्तावेज के बारे में सफाई मांगी और जानना चाहा कि यह प्रमाण पत्र उन्हें कैसे और किसके माध्यम से प्राप्त हुआ।
हालांकि, मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड ने इस मामले में अपेक्षित जानकारी देने में असमर्थता दिखाई और अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
फर्जीवाड़े की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर के निर्देश
इस घटना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, चिप्स के सीईओ ने 2 फरवरी 2025 को सिविल लाइंस थाने में मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने हेतु पत्र भेजा।
अब इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कंपनी ने यह फर्जी प्रमाण पत्र कैसे प्राप्त किया और इसका उपयोग बीएसएनएल की निविदा में क्यों किया।
कैसे हुआ फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल?
प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि बीएसएनएल द्वारा जारी की गई निविदा में भाग लेने के लिए मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड ने चिप्स के ‘भारतनेट फेज-2’ परियोजना के अनुभव प्रमाण पत्र का उपयोग किया।
हालांकि, जब इस दस्तावेज की सत्यता की जांच की गई तो यह स्पष्ट हुआ कि चिप्स ने ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था।
इस मामले में संभावित धोखाधड़ी और कदाचार की आशंका के चलते चिप्स के अधिकारियों ने कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया।
निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयास
राज्य सरकार और चिप्स ने निविदा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद, चिप्स ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी कंपनी या संस्था द्वारा इस प्रकार के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
- बीएसएनएल की निविदा में भाग लेने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया।
- चिप्स द्वारा जांच में प्रमाण पत्र की असलियत संदिग्ध पाई गई।
- मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड से जवाब मांगा गया, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
- चिप्स के सीईओ ने 2 फरवरी 2025 को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।
- मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस और अन्य एजेंसियों को जांच सौंपी जाएगी।
क्या हो सकते हैं कानूनी परिणाम?
फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करना भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध है। यदि जांच में यह साबित होता है कि मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड ने जानबूझकर फर्जी प्रमाण पत्र का उपयोग किया, तो कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC 420), आपराधिक साजिश (IPC 120B) और सरकारी दस्तावेजों में जालसाजी (IPC 468, 471) जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
इसके अलावा, अगर कंपनी को दोषी पाया गया, तो उसे भविष्य में सरकारी निविदाओं में भाग लेने से भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।
भविष्य में सख्त निगरानी और सुधार की आवश्यकता
इस मामले के बाद, निविदा प्रक्रिया में कड़ी निगरानी और प्रमाण पत्र सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
चिप्स ने सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी निविदाओं में प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों की पूरी तरह से जांच करें, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी को समय रहते रोका जा सके।
इस पूरे मामले की जांच से यह स्पष्ट होगा कि फर्जी दस्तावेजों के पीछे कौन लोग शामिल थे और यह प्रमाण पत्र कैसे तैयार किया गया।
अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में पुलिस की जांच किस दिशा में जाती है और इस मामले में कौन-कौन दोषी पाए जाते हैं।

