राजनांदगांव। “मुख्यमंत्री साय ने डोंगरगढ़ में आचार्य विद्यासागर जी को श्रद्धांजलि दी।”
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थस्थल में आज आचार्य विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समाधि स्थल पर पहुंचकर आचार्य श्री को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज आध्यात्मिक चेतना के पुंज थे। उनके विचार, उनका तप और उनके आदर्श समस्त मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी आचार्य से प्रेरणा लेते थे और हमेशा उनके आशीर्वाद के लिए तत्पर रहते थे।
साय ने कहा, “हम सबका सौभाग्य है कि आचार्य जी ने हमें सदैव मार्गदर्शन दिया। छत्तीसगढ़ की यह भूमि धन्य है कि आचार्य श्री ने संलेखना (संयमपूर्वक मृत्यु का व्रत) के लिए इसे चुना और अपने जीवन का लंबा समय यहाँ व्यतीत किया। यह प्रदेश उनके सान्निध्य से आलोकित हुआ है। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि उनकी समाधि के दर्शन करने का अवसर मिला। मेरी प्रार्थना है कि उनका आशीर्वाद सदैव प्रदेश पर बना रहे और छत्तीसगढ़ में समृद्धि एवं शांति बनी रहे।”
आचार्य श्री का जीवन, सत्य और अहिंसा का प्रतीक
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी ने समाज को सत्य, अहिंसा और परमार्थ के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। उनका जीवन-दर्शन संपूर्ण समाज के लिए अनुकरणीय है। उनके विचारों ने न केवल जैन समुदाय, बल्कि पूरे भारत के नागरिकों को प्रभावित किया। वे आत्मशुद्धि, संयम और तपस्या की जीवंत मूर्ति थे, जिनका जीवन सेवा और त्याग का संदेश देता है।
आचार्य श्री ने भारतीय संस्कृति और राष्ट्रप्रेम को महत्व देते हुए भारत की एकता और अखंडता को हमेशा सर्वोपरि रखा। उन्होंने शिक्षा प्रणाली को भारतीय मूल्यों से जोड़ने का आग्रह किया था और इस दिशा में उन्होंने जीवनभर प्रयास किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने आचार्य जी के सपनों को साकार किया
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की यह स्पष्ट मान्यता थी कि भारतीय शिक्षण पद्धति लागू होनी चाहिए और लोगों को आपसी संवाद के लिए भारतीय भाषा को अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से आचार्य जी के विचारों को साकार करने का प्रयास किया है। आज हमारी शिक्षा प्रणाली भारतीय मूल्यों और संस्कृति से जुड़ी हुई है, जो आचार्य जी के स्वप्न को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
डोंगरगढ़ का चंद्रगिरि तीर्थस्थल – आचार्य श्री की साधना भूमि
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि डोंगरगढ़ का चंद्रगिरि तीर्थस्थल प्रदेशवासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहां आचार्य श्री ने अपने जीवन का एक लंबा कालखंड धर्म साधना और आत्मकल्याण के लिए व्यतीत किया। यह स्थान अब आध्यात्मिक चेतना और जैन धर्म के प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र बन गया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि आचार्य श्री ने अपनी अंतिम संलेखना के लिए इस पवित्र भूमि को चुना। यह प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात है और हमें उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलना चाहिए।
समारोह में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव में पूज्य मुनि संतसागर जी महाराज, देशभर से पधारे मुनि संघ, साध्वीगण और हजारों की संख्या में अनुयायी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी श्रद्धालुओं के साथ मिलकर समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
इस अवसर पर धर्मसभा, भजन-कीर्तन, प्रवचन और ध्यान साधना जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
मुख्यमंत्री की प्रार्थना – प्रदेश में बनी रहे शांति और समृद्धि
समाधि स्थल पर अपनी श्रद्धा अर्पित करने के पश्चात मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, “आचार्य विद्यासागर जी का आशीर्वाद छत्तीसगढ़ प्रदेश पर सदैव बना रहे। उनके विचार और शिक्षाएं हमें धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहें।”
डोंगरगढ़ के इस आयोजन ने पूरे प्रदेश में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया और श्रद्धालुओं में समर्पण, शांति और आत्मकल्याण की भावना को प्रबल किया।

