“संगीत, सम्मान और सौहार्द्र से सजी अविस्मरणीय संध्या।”
संगीत की महक, सम्मान की गरिमा और भावनाओं की मिठास—इन तीनों का संगम जब एक मंच पर होता है, तो एक अविस्मरणीय संध्या का जन्म होता है। ऐसी ही एक संगीतमय और उल्लासपूर्ण रात का साक्षी बना कार्यक्रम “गाता रहे मेरा दिल”, जिसका आयोजन बड़े ही भव्य अंदाज में किया गया। यह कार्यक्रम केवल सुरों की महफिल नहीं था, बल्कि यह सम्मान, दोस्ती और सामंजस्य का उत्सव भी था। इस विशेष आयोजन के पीछे गाता रहे मेरा दिल ग्रुप की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके डायरेक्टर श्री नवाब कादिर हैं।
इस कार्यक्रम की खास बात यह थी कि इसे श्री विनोद देवांगन एवं श्रीमती उर्मिला देवांगन की वैवाहिक वर्षगांठ के शुभ अवसर पर आयोजित किया गया था। इस मनमोहक संध्या में कई प्रतिभाशाली गायकों ने अपनी सुरीली आवाज़ से माहौल को संगीतमय बना दिया और उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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वास्तुगुरुजी राणा सिकंदर को मिला विशेष सम्मान
इस संगीतमय संध्या की सबसे महत्वपूर्ण और गौरवशाली घड़ी वह थी, जब मुझे, वास्तुगुरुजी राणा सिकंदर, इस प्रतिष्ठित मंच से विशेष सम्मान से नवाज़ा गया। यह मेरे लिए न केवल गर्व का क्षण था, बल्कि मेरे कार्यों की मान्यता और समाज की स्वीकृति का भी प्रतीक था।
सम्मान पाना हमेशा हृदय को प्रसन्नता से भर देता है, लेकिन जब यह सम्मान एक ऐसे मंच से मिले, जहाँ संगीत, संस्कार और सद्भावना का संगम हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। मैं आयोजकों, गाता रहे मेरा दिल ग्रुप, श्री नवाब कादिर और पूरे आयोजन दल का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझे इस सम्मान के योग्य समझा। यह न केवल मेरे लिए, बल्कि मेरे पूरे कार्यक्षेत्र और उन सभी के लिए गर्व का विषय है जो वास्तुशास्त्र को एक नई ऊँचाई पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।
संगीत का जादू—गायकों की शानदार प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम केवल सम्मान तक सीमित नहीं था, बल्कि यह संगीतमय यात्रा भी थी, जहाँ अनेक प्रतिष्ठित और प्रतिभाशाली गायकों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। मंच पर जब सुरों की बयार बही, तो हर कोई झूम उठा और संगीतमय वातावरण में खो गया।
इस विशेष संध्या में जिन गायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध किया, वे थे:
संजय शर्मा – जिनकी जादुई आवाज़ ने कार्यक्रम की शुरुआत को विशेष बना दिया।
भोंसले त्रिपाठी – जिन्होंने अपने सुरों से सभी को पुरानी यादों में ले जाकर मंत्रमुग्ध कर दिया।
नवाब कादिर – जिनका गायन हमेशा की तरह ऊर्जावान और दिल को छू लेने वाला था।
अजूबा झा – जिनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में एक नया जोश भर दिया।
गीता लक्ष्मी – जिनकी मीठी आवाज़ ने हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया।
धनेश अग्रवाल – जिनकी प्रस्तुति ने संध्या को एक नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया।
इन सभी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं के दिलों में बस जाने वाली यादें बना दीं। मंच पर पुराने सदाबहार गीतों से लेकर नए जमाने की धुनों तक, हर तरह का संगीतमय रंग देखने को मिला।
विशिष्ट अतिथि एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस भव्य आयोजन की शोभा बढ़ाने के लिए कई गणमान्य अतिथि और प्रमुख व्यक्ति भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों के रूप में उपस्थित थे:
राजीव गांधी वार्ड के पार्षद श्री तिलक पटेल
कांग्रेसी नेता श्री मुझ्ज़फ्फर खान
इन गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी गरिमामयी बना दिया। उनकी उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी भी है।

आयोजन समिति और सहयोगियों का आभार
ऐसे भव्य कार्यक्रम के आयोजन में अनेकों लोगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इस कार्यक्रम की सफलता के पीछे आयोजक मंडल और उनकी पूरी टीम की मेहनत रही, जिन्होंने इस शाम को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मैं विशेष रूप से गाता रहे मेरा दिल ग्रुप के डायरेक्टर श्री नवाब कादिर का आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके प्रयासों से यह आयोजन सफल रहा।
इसके अलावा, मंच संचालन, संगीत संयोजन, प्रकाश एवं ध्वनि प्रबंधन, और संपूर्ण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने में योगदान देने वाले सभी सहयोगियों को भी धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने इसे भव्य बनाने में अपनी भूमिका निभाई।
“गाता रहे मेरा दिल” – एक यादगार सफर
यह कार्यक्रम सिर्फ़ एक संगीतमय संध्या नहीं थी, बल्कि यह भावनाओं, संगीत, सम्मान और सौहार्द्र का उत्सव था। इसमें उपस्थित हर व्यक्ति ने इस शानदार शाम का भरपूर आनंद लिया और इसे अपनी यादों में संजो लिया।
संगीत की यह महफ़िल हमें यह अहसास दिलाती है कि सुरों में जादू होता है, जो हर दिल को छू सकता है और हर आत्मा को सुकून दे सकता है। “गाता रहे मेरा दिल” न केवल संगीत प्रेमियों के लिए, बल्कि समाज को जोड़ने और आपसी सौहार्द्र को बढ़ावा देने का भी एक माध्यम बन चुका है।
एक बार फिर से आयोजकों, गायकों, अतिथियों और सभी उपस्थितजनों का हृदय से आभार, जिन्होंने इस संगीतमय यात्रा को इतना सुंदर और अविस्मरणीय बनाया।
यह संगीतमय सफर आगे भी जारी रहेगा!
संगीत और सम्मान की इस यात्रा को आगे भी बनाए रखें!
- वास्तुगुरुजी राणा सिकंदर

