रायपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना
छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमिहीन मजदूरों के जीवन में आर्थिक स्थिरता लाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने न्यू सर्किट हाउस के ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में इस योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, “छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में लोग कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन उनमें से कई भूमिहीन हैं। हमने इन भूमिहीन कृषि मजदूर भाई-बहनों से वादा किया था कि उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करेंगे। आज हमें गर्व है कि हमने इस वादे को पूरा किया है।”

5.62 लाख से अधिक मजदूर परिवारों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना से राज्य के 5 लाख 62 हजार 112 भूमिहीन मजदूर परिवारों को लाभ मिलेगा। इसके तहत सरकार ने 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि का प्रावधान किया है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की जाएगी।
इस योजना में भूमिहीन कृषि मजदूरों के साथ-साथ वनोपज संग्राहकों, चरवाहों, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, और अन्य पारंपरिक कार्य करने वाले परिवारों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी पुजारी, बैगा, गुनिया, और माँझी जैसे समुदायों को भी योजना का लाभ मिलेगा।
भूमिहीन मजदूरों के जीवन में बदलाव का वादा
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भूमिहीन मजदूर परिवारों की आय बढ़ाना, उनके बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना, और उनके जीवन को खुशहाल बनाना है। उन्होंने कहा कि यह योजना भूमिहीन मजदूरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक माध्यम बनेगी।
प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी हुई पूरी
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ के लिए किए गए वादों का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी जी की गारंटियों को पूरा करना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर धान खरीदी तक, हमारी सरकार ने सभी वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया है।”
उन्होंने बताया कि राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता का दायरा बढ़ाकर 18 लाख जरूरतमंद परिवारों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, चालू खरीफ सीजन में सरकार 31 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीद रही है।
अन्य वादों को भी किया पूरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत माताओं-बहनों को प्रति माह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक इस योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को 7,182 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
इसके अलावा, तेंदूपत्ता संग्रहण की दर को 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दिया गया है, जिससे वनवासी क्षेत्र के 12.5 लाख से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को लाभ मिला है।
किसानों और मजदूरों को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसानों और मजदूरों की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि खेती छोड़ चुके किसान अब वापस कृषि की ओर लौट रहे हैं क्योंकि उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। इसी तरह, भूमिहीन मजदूरों के लिए इस योजना ने आर्थिक संबल का काम किया है।
प्रभावित परिवारों की खुशी
इस अवसर पर भूमिहीन मजदूर परिवारों ने सरकार के इस कदम की सराहना की। लाभार्थियों को समारोह में 10,000 रुपये के चेक वितरित किए गए। लाभार्थियों ने कहा कि यह योजना उनके परिवारों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है।
राजस्व मंत्री और अन्य नेताओं की सराहना
राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा, “हमारे मुख्यमंत्री श्री साय और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास कर रहा है। दीनदयाल जी के सपनों को साकार करने का यह प्रयास प्रशंसनीय है।”
समारोह में विधायक श्री अनुज शर्मा, श्री पुरंदर मिश्रा, और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
निष्कर्ष
‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ छत्तीसगढ़ के भूमिहीन मजदूर परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि उनके बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव भी रखेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के हर नागरिक तक सुशासन का लाभ पहुंचाना है। इस योजना के माध्यम से सरकार ने यह साबित किया है कि वह जनता से किए हर वादे को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह योजना राज्य के विकास और सामाजिक समृद्धि की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

