रायपुर। बच्चों की इम्युनिटी और स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक स्वर्णप्राशन
बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, पाचन शक्ति, स्मरण शक्ति, और शारीरिक विकास को बढ़ावा देने के लिए शासकीय आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में स्वर्णप्राशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बुधवार को 2516 बच्चों को स्वर्णप्राशन कराया गया, जबकि 179 बच्चों को विशेष रूप से तैयार किए गए बाल रक्षा किट वितरित किए गए।
स्वर्णप्राशन का महत्व
स्वर्णप्राशन एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें बच्चों को स्वर्ण भस्म और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार मिश्रण दिया जाता है। यह प्रक्रिया बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने, पाचन सुधारने, और मानसिक विकास में सहायक होती है। शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के कौमारभृत्य विभाग द्वारा हर पुष्य नक्षत्र तिथि पर शून्य से 16 वर्ष तक के बच्चों को यह उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
बाल रक्षा किट का वितरण
179 बच्चों को पांच आयुर्वेदिक दवाओं से निर्मित बाल रक्षा किट वितरित किए गए। इन किटों में ऐसी औषधियां शामिल थीं, जो बच्चों को विभिन्न रोगों से बचाने और उनकी इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करती हैं।
विशेषज्ञों की देखरेख में कार्यक्रम
स्वर्णप्राशन कार्यक्रम का संचालन आयुष विभाग की संचालक सुश्री इफ्फत आरा, महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. जी.आर. चतुर्वेदी, चिकित्सालय अधीक्षक प्रो. डॉ. प्रवीण कुमार जोशी और कौमारभृत्य विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. नीरज अग्रवाल के निर्देशन में किया गया। इस दौरान डॉ. लवकेश चंद्रवंशी ने बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया और आवश्यक सलाह दी।
स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों की भागीदारी
कार्यक्रम में महाविद्यालय के कौमारभृत्य विभाग की व्याख्याता डॉ. सत्यवती राठिया के साथ स्नातकोत्तर और स्नातक छात्रों ने सक्रिय भूमिका निभाई। हर महीने आयोजित होने वाले इस स्वर्णप्राशन कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं का योगदान इसे सफल बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
अभिभावकों ने की सराहना
स्वर्णप्राशन और बाल रक्षा किट वितरण को लेकर अभिभावकों ने कार्यक्रम की सराहना की। एक अभिभावक ने कहा, “आयुर्वेदिक उपचार बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। स्वर्णप्राशन से हमारे बच्चों की इम्युनिटी और मानसिक विकास बेहतर हुआ है। बाल रक्षा किट ने हमें अतिरिक्त सुरक्षा का एहसास दिया है।”
आयुर्वेद का बढ़ता महत्व
आयुर्वेद विभाग के अनुसार, स्वर्णप्राशन जैसी प्रक्रियाएं बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बनाने में प्रभावी हैं। इससे न केवल उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, बल्कि यह उन्हें भविष्य में होने वाले संक्रमणों और बीमारियों से भी बचाती है।
आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास
महाविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य आयुर्वेदिक चिकित्सा के लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। आयुर्वेदिक चिकित्सा न केवल सुरक्षित है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित करने में भी सहायक है।
उल्लेखनीय योगदान
स्वर्णप्राशन और बाल रक्षा किट वितरण जैसे कार्यक्रमों से आयुर्वेद के प्रति समाज का विश्वास और जागरूकता बढ़ रही है। हर महीने इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों और उनके अभिभावकों की भागीदारी इस पहल की सफलता को दर्शाती है।
यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रोत्साहित करता है, बल्कि आयुर्वेद की प्राचीन विधाओं को आधुनिक समाज में नई पहचान देने का भी काम कर रहा है।

