रायपुर। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में बैंकिंग प्रणाली की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पिछड़े और दूरस्थ क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वित्त मंत्री चौधरी ने यह बातें आज राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की समीक्षा बैठक में कहीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बैंकिंग सिस्टम राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और इसके विस्तार के बिना विकास संभव नहीं है।
बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता
वित्त मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार हुआ है, लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में इसकी गुंजाइश है। उन्होंने विशेष रूप से उन जिलों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता जताई, जहां क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात कम है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ का सीडी अनुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और यह देश में तीसरा सर्वाधिक सीडी अनुपात वाला राज्य है।
चौधरी ने बैंक अधिकारियों से आग्रह किया कि किसानों के साथ-साथ उद्यानिकी, मत्स्यपालन और पशुपालन क्षेत्रों के लिए भी ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए ऋण सुविधा
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख से अधिक आवास निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि लाभार्थियों को बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाए, तो इससे न केवल आवास निर्माण में तेजी आएगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।
नवा रायपुर में बैंकिंग हब की योजना
चौधरी ने नवा रायपुर में बैंकों के रीजनल और हेड ऑफिस स्थापित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार इस पहल के लिए जमीन आवंटन में प्राथमिकता देगी। इसके साथ ही, उन्होंने बैंकों को आश्वासन दिया कि नई शाखाओं को सरकारी योजनाओं की डिपॉजिट दिलाने की पहल की जाएगी।
पिछड़े क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं
वित्त मंत्री ने दूरस्थ और पिछड़े इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में बैंक शाखाओं की स्थापना से न केवल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में भी आसानी होगी।
बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी और सुझाव
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव सुश्री निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, एसबीआई के उप प्रबंध निदेशक सुरेन्दर राणा, और सीजीएम नाबार्ड ज्ञानेंद्र मणि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने राज्य की बैंकिंग सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न सुझाव दिए।
प्रमुख बिंदु:
- कृषि ऋण वितरण: किसानों को खरीफ, रबी और अन्य कृषि गतिविधियों के लिए पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराया जाए।
- सीडी अनुपात में सुधार: कम सीडी अनुपात वाले जिलों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता।
- बैंक शाखाओं का विस्तार: दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार किया जाए।
- बायोमेट्रिक आधारित सेवाएं: बैंकिंग सेवाओं में डिजिटल और बायोमेट्रिक सिस्टम को बढ़ावा दिया जाए।
सरकार की प्रतिबद्धता
वित्त मंत्री चौधरी ने छत्तीसगढ़ में बैंकिंग प्रणाली को और सुदृढ़ करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बैंकों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक गतिशील बनाया जा सके।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की यह बैठक छत्तीसगढ़ के वित्तीय विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। राज्य सरकार और बैंकिंग संस्थान मिलकर प्रदेश के पिछड़े और दूरस्थ क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि और विकास के लिए काम करने के लिए तत्पर हैं।

