बिलासपुर। दीक्षांत समारोह
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर में आयोजित 11वें दीक्षांत समारोह में आज उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को स्वर्ण पदक एवं उपाधियों से सम्मानित करते हुए युवाओं को प्रेरणादायक संदेश दिया। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्यपाल श्री रमेन डेका, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने युवाओं को “नए भारत के राजदूत” बताते हुए कहा कि देश को उनकी ऊर्जा और नवाचार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवाओं को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कौशल और सामर्थ्य का सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए। उन्होंने जीवन में कभी असफलताओं से घबराने की बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
शैक्षिक उपलब्धियों का सम्मान
समारोह में शैक्षणिक सत्र 2022-23 और 2023-24 के दौरान प्रावीण्य सूची में शामिल 155 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और अन्य विशेष पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 78 स्वर्ण पदक, 9 दानदाता पदक, 1 गुरु घासीदास पदक और 1 कुलाधिपति पदक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, 122 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
उपराष्ट्रपति ने बाबा गुरु घासीदास के संदेशों को याद करते हुए एकता और समानता की भावना को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं को तकनीकी कौशल और नवाचार के साथ देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति को बताया देश का भविष्य
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति को देश के नव निर्माण में अहम बताते हुए कहा कि राज्य में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति के तहत अगले पांच वर्षों में 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 5 लाख नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इकलौते केंद्रीय विश्वविद्यालय का नामकरण महान संत बाबा गुरु घासीदास जी के नाम पर किया गया है, जो ज्ञान, समावेशिता और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक हैं। यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा स्थापित कर चुका है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर को आईटी हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां बड़ी आईटी कंपनियां अपनी इकाइयां स्थापित कर रही हैं। साथ ही, यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ के युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए दिल्ली के द्वारका में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 185 कर दी गई है।
राज्यपाल ने विविधता और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान करने की प्रेरणा दी
राज्यपाल रमेन डेका ने स्वर्ण पदक और पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उनकी मेहनत और समर्पण के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ में शिक्षा और ज्ञान का प्रकाश स्तंभ है। विद्यार्थियों को विविधता का सम्मान करने और देश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की प्रेरणा दी।
समग्र विकास के लिए शिक्षा और नवाचार पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा सामाजिक बदलाव का आधार है और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने इसे बार-बार साबित किया है। यहां न केवल शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं, बल्कि नवाचारों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर छात्र को एक बेहतर जीवन जीने का अवसर मिले।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे केवल नौकरी खोजने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार करते हुए दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करें। उन्होंने कहा कि 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवाओं की अहम भागीदारी होगी।
विशेष अतिथियों की उपस्थिति
समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी मंत्री तोखन साहू, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक धरम लाल कौशिक, और विधायक धर्मजीत सिंह सहित विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल, एआईसीटी के प्रोफेसर टी.जी. सीताराम, राष्ट्रीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रमुख डॉ. अतुल भाई कोठारी, शिक्षाविद, शोधकर्ता, विद्यार्थी-अभिभावक और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
नवभारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की भूमिका
उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ को खनिज संपदा से भरपूर राज्य बताते हुए कहा कि यहां विकास की असीम संभावनाएं हैं। नक्सली उन्मूलन के प्रयासों और समग्र विकास योजनाओं ने प्रदेश को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि विकास के इस माहौल में नक्सलवाद के लिए कोई स्थान नहीं है।
समारोह में युवाओं के साथ-साथ उपस्थित अतिथियों ने भी उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के विचारों का समर्थन किया। यह दीक्षांत समारोह न केवल शैक्षिक उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा और नव निर्माण की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।

