घर में मूर्ति स्थापित करते समय वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करें। सही दिशा, स्थान और विधि से पूजा करें, सकारात्मक ऊर्जा पाएं और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करें।
घर में देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित करना एक पवित्र और शुभ कार्य माना जाता है। यह न केवल घर के वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरता है, बल्कि परिवार के सदस्यों पर भी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। लेकिन, मूर्ति स्थापना के दौरान वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। यदि मूर्तियों को सही दिशा, स्थान और विधि से स्थापित नहीं किया जाता, तो इसका प्रभाव विपरीत भी हो सकता है। इस ब्लॉग में हम उन मुख्य वास्तु नियमों पर चर्चा करेंगे जिन्हें मूर्ति स्थापना के समय ध्यान में रखना चाहिए।
Read It Loud
1. मूर्ति स्थापना की सही दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में मूर्ति स्थापित करने के लिए सही दिशा का चयन बहुत महत्वपूर्ण है।
- उत्तर-पूर्व (ईशान कोण): यह दिशा पूजा घर या मंदिर के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिशा में स्थापित मूर्तियां घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करती हैं और देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है।
- पूर्व दिशा: यह दिशा भी पूजा के लिए अनुकूल मानी जाती है। यदि ईशान कोण उपलब्ध न हो, तो मूर्ति को पूर्व दिशा में रखा जा सकता है।
- दक्षिण दिशा: इस दिशा में मूर्ति रखने से बचना चाहिए क्योंकि इसे शुभ नहीं माना जाता। यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है।
2. वास्तु शास्त्र के अनुसार मूर्ति की ऊंचाई और आकार
- मूर्ति की ऊंचाई: घर में रखी जाने वाली मूर्तियों की ऊंचाई 6 से 9 इंच के बीच होनी चाहिए। बहुत बड़ी मूर्तियां घर में नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं, जबकि बहुत छोटी मूर्तियां पूजा के लिए उपयुक्त नहीं मानी जातीं।
- मूर्ति का आकार: देवी-देवताओं की मूर्ति का चेहरा शांत और सौम्य होना चाहिए। गुस्से वाले या भयावह चेहरों वाली मूर्तियां घर में रखने से बचना चाहिए।

3. वास्तु शास्त्र के अनुसार मूर्ति का स्थान
- पृथक स्थान: देवी-देवताओं की मूर्तियों को ऐसे स्थान पर रखें जो साफ-सुथरा हो और जहाँ बाहरी शोर-शराबा न हो।
- दीवार से दूरी: मूर्ति को दीवार से सटाकर न रखें। दीवार और मूर्ति के बीच कम से कम 1 से 3 इंच की दूरी होनी चाहिए ताकि हवा का प्रवाह बना रहे।
- भोजन कक्ष में मूर्ति: रसोई या भोजन कक्ष में मूर्तियां स्थापित करने से बचें।
4. एक से अधिक मूर्तियां न रखें
वास्तु शास्त्र के अनुसार, एक ही देवी-देवता की दो या अधिक मूर्तियां एक ही स्थान पर रखने से बचना चाहिए। इससे ऊर्जा का टकराव होता है और यह अशुभ माना जाता है।
5. मूर्ति स्थापना की विधि
- साफ-सफाई: मूर्ति को स्थापित करने से पहले स्थान को साफ और शुद्ध कर लें। पूजा स्थल पर रोजाना सफाई करना जरूरी है।
- सही आसन: मूर्ति को हमेशा एक ऊँचे आसन पर स्थापित करें। इसे जमीन पर सीधे रखने से बचें।
- मुख की दिशा: मूर्ति का मुख हमेशा पूजक की ओर होना चाहिए।
6. मूर्ति के साथ अन्य पूजा सामग्री
- मूर्तियों के साथ हमेशा शंख, घंटी और दीपक रखें। ये चीजें घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक होती हैं।
- ताजे फूल और तुलसी के पत्तों का प्रयोग करें। सूखे फूल और मुरझाए पत्तों को पूजा स्थल पर न रखें।

7. ध्यान और प्रार्थना
वास्तु शास्त्र के अनुसार मूर्ति स्थापना का उद्देश्य सिर्फ सजावट नहीं है। यह आध्यात्मिक शांति और ईश्वर की कृपा पाने के लिए है। रोजाना सुबह और शाम को पूजा और ध्यान करें। यह आपके मन को शांति और स्थिरता प्रदान करेगा।
8. किस प्रकार की मूर्तियां न रखें
- टूटी-फूटी मूर्ति: घर में टूटी या खंडित मूर्ति रखना अशुभ माना जाता है। ऐसी मूर्तियों को तुरंत विसर्जित कर दें।
- अनुचित मुद्राओं वाली मूर्तियां: देवी-देवताओं की मूर्तियां हमेशा शुभ मुद्राओं में होनी चाहिए।
9. रोशनी और दीपक की व्यवस्था
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा स्थल पर हमेशा उचित रोशनी होनी चाहिए। शाम के समय दीपक जलाना अनिवार्य है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाने में सहायक होता है।
10. ध्वनि और मंत्रोच्चारण
मूर्ति स्थापना के बाद, नियमित रूप से शंख, घंटी और मंत्रोच्चारण करना चाहिए। यह घर की ऊर्जा को पवित्र बनाता है और नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है।
11. धूप और अगरबत्ती का उपयोग
पूजा के दौरान धूप और अगरबत्ती का उपयोग जरूर करें। इनकी सुगंध से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बनता है।
12. पारिवारिक सदस्यों की सहभागिता
पूजा और मूर्ति स्थापना में परिवार के सभी सदस्यों की सहभागिता होनी चाहिए। इससे घर में सामूहिक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
13. गणपति की स्थापना के नियम
गणपति की मूर्ति स्थापना के लिए विशेष ध्यान रखें। इन्हें उत्तर-पूर्व दिशा में रखें और हमेशा जल, फल और दूर्वा चढ़ाएं। गणपति का मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए।
14. हनुमान जी की मूर्ति स्थापना
हनुमान जी की मूर्ति को दक्षिण दिशा की ओर रखें क्योंकि यह दिशा उन्हें प्रिय है। ध्यान दें कि हनुमान जी की मूर्ति घर के मंदिर में श्रीराम और सीता जी के साथ ही होनी चाहिए।
15. मूर्ति विसर्जन का नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार जब मूर्ति पुरानी हो जाए या खंडित हो जाए, तो उसे विसर्जित कर देना चाहिए। विसर्जन के समय उचित विधि का पालन करें और इसे जल में प्रवाहित करें।
निष्कर्ष
घर में मूर्ति स्थापना का कार्य बहुत पवित्र है और इसे पूरे नियमों और विधि-विधान के साथ करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करने से न केवल घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी मिलता है। इसलिए, यदि आप अपने घर में सुख, शांति और समृद्धि चाहते हैं, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें।
सतर्कता और श्रद्धा से किया गया यह कार्य आपके जीवन को हर प्रकार से खुशहाल बनाएगा।

