रायपुर। मकर संक्रांति और पोंगल पर्व
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति और पोंगल पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इस अवसर पर सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि ये त्योहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मकर संक्रांति, पोंगल और लोहड़ी जैसे पर्व देश की विविधता में एकता का उदाहरण हैं। उन्होंने कहा, “देश के विभिन्न क्षेत्रों में ये पर्व अलग-अलग नामों से मनाए जाते हैं, लेकिन इनका संदेश एक ही है – प्राकृतिक संसाधनों और ऋतु परिवर्तन का स्वागत करते हुए फसल और समृद्धि के लिए आभार व्यक्त करना।”
पोंगल: समृद्धि का प्रतीक
दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले पोंगल पर्व का विशेष उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह त्योहार समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह पर्व किसानों द्वारा अपनी मेहनत के फलों को मनाने और फसल की सफलता के लिए प्रकृति का आभार व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा, “पोंगल हमें प्रकृति और उसके योगदान की सराहना करने की प्रेरणा देता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने परिवेश के साथ सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं।”
मकर संक्रांति: ऋतु परिवर्तन का संदेश
मुख्यमंत्री ने मकर संक्रांति को ऋतु परिवर्तन का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। “मकर संक्रांति का पर्व हमारे जीवन में नई ऊर्जा और उम्मीदें लेकर आता है। यह अवसर न केवल मौसम के बदलाव का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है,” उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मकर संक्रांति पर लोग तिल-गुड़ जैसे मिठाई और पकवानों के माध्यम से एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। यह परंपरा आपसी प्रेम और स्नेह को बढ़ावा देती है।
ऋतु परिवर्तन और समृद्धि की कामना
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस अवसर पर समाज में सामंजस्य और सद्भावना को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा, “मकर संक्रांति और पोंगल पर्व हमारे समाज में सहयोग, एकता और सद्भावना के महत्व को रेखांकित करते हैं। ये पर्व हमें सिखाते हैं कि हम अपनी सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करें और एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशी मनाएं।”
मुख्यमंत्री ने इस पर्व को प्राकृतिक चक्र और कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति और पोंगल न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देते हैं, बल्कि यह किसानों की मेहनत और उनकी सफलता का भी उत्सव है।
सभी के लिए सुख-समृद्धि की कामना
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति और पोंगल पर्व के इस शुभ अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा, “यह त्योहार आपके जीवन में खुशियां, समृद्धि और शांति लेकर आए। यह अवसर हमें अपनी परंपराओं और संस्कृति के महत्व को समझने और उन्हें सहेजने का अवसर देता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में उत्सव और त्योहारों का महत्व केवल व्यक्तिगत आनंद तक सीमित नहीं है, बल्कि ये समाज के सामूहिक विकास और खुशी का भी प्रतीक हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे इन त्योहारों को मिलजुलकर मनाएं और अपने जीवन में सकारात्मकता का संचार करें।
समृद्धि और सहयोग का संदेश
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे त्योहारों का उद्देश्य न केवल खुशी और आनंद मनाना है, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और सामूहिक समृद्धि का संदेश फैलाना है। उन्होंने कहा, “मकर संक्रांति और पोंगल हमें यह सिखाते हैं कि हम कैसे अपने आसपास के लोगों के साथ खुशी बांट सकते हैं और समाज को एक बेहतर जगह बना सकते हैं।”
प्रदेश में उत्साह का माहौल
प्रदेश भर में मकर संक्रांति और पोंगल पर्व को लेकर उत्साह का माहौल है। लोग तिल-गुड़, पतंगबाजी और विशेष व्यंजनों के माध्यम से त्योहार की खुशियां मना रहे हैं। मुख्यमंत्री के संदेश ने इस उत्सव में एक सकारात्मक ऊर्जा और उल्लास का संचार किया है।
छत्तीसगढ़ में मकर संक्रांति और पोंगल का यह पर्व न केवल सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, बल्कि यह त्योहार प्रदेशवासियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश भी देता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संदेश ने इन पर्वों के महत्व को और भी गहराई से उजागर किया है।
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