रायपुर। राजा शक्ति राज ने गुरु गोविंद सिंह जयंती पर श्रद्धा और सेवा का संदेश दिया
गुरु गोविंद सिंह जयंती सिख धर्म का एक विशेष पर्व है, जिसे सिख समुदाय और अन्य धर्मों के लोग बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। यह दिन सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन, उनके उपदेशों और बलिदानों को याद करने का अवसर है। 2025 में, उनकी 358वीं जयंती को पूरे देश में प्रकाश पर्व के रूप में मनाया गया।
इस अवसर पर रायपुर के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और दबंग सूचना के संचालक राजा शक्ति राज ने भी अपने पूरे परिवार के साथ गुरुद्वारे में जाकर मत्था टेका। उनके साथ जसमेर कौर वालिया, जो विशेष रूप से पठानकोट से इस पर्व को मनाने आईं, ने भी गुरु गोविंद सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन: बलिदान और प्रेरणा का प्रतीक
गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन अद्वितीय प्रेरणा और बलिदान का प्रतीक है। उनका जन्म 1666 में पटना साहिब (बिहार) में हुआ था। वह न केवल एक महान धार्मिक गुरु थे, बल्कि एक योद्धा, कवि और विचारक भी थे। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की, जो सिख धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने जीवन में न केवल अपने परिवार का बलिदान दिया, बल्कि समाज में न्याय और सच्चाई के लिए अपने अनुयायियों को प्रेरित किया। उन्होंने हमेशा धर्म और मानवता के लिए खड़े रहने का संदेश दिया। उनके जीवन की शिक्षाएं आज भी समाज को एकजुटता, भाईचारे और साहस के लिए प्रेरित करती हैं।
रायपुर के गुरुद्वारों में भव्य आयोजन
रायपुर के गुरुद्वारों में गुरु गोविंद सिंह जयंती पर भव्य आयोजन किए गए। गुरुद्वारों को विशेष रूप से सजाया गया था, जहां रागी जत्थों द्वारा शबद-कीर्तन की प्रस्तुति दी गई। श्रद्धालुओं ने गुरुग्रंथ साहब पर मत्था टेककर अपने गुरु को नमन किया और उनके उपदेशों को याद किया।
पंडरी गुरुद्वारा में इस अवसर पर विशेष दीवान सजाया गया, जहां शबद-कीर्तन ने संगत को भक्ति में डुबो दिया। श्रद्धालुओं ने दिन भर गुरुद्वारे में लंगर का आनंद लिया और गुरु गोविंद सिंह जी के दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
राजा शक्ति राज ने परिवार सहित जताई श्रद्धा
दबंग सूचना के संचालक राजा शक्ति राज, जो रायपुर के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं, ने अपने पूरे परिवार के साथ इस पावन पर्व को मनाया। उन्होंने पंडरी गुरुद्वारे में मत्था टेका और गुरु गोविंद सिंह जी के उपदेशों को याद किया।
राजा शक्ति राज ने कहा, “गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन बलिदान और साहस का प्रतीक है। उनकी शिक्षाएं हमें सिखाती हैं कि सच्चाई और धर्म के लिए कैसे खड़ा होना चाहिए। आज का दिन हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है और हमें अपने जीवन में उनके आदर्शों को अपनाने की जरूरत है।”
जसमेर कौर वालिया: विशेष रूप से पठानकोट से पहुंचीं रायपुर
जसमेर कौर वालिया, जो कि पठानकोट की रहने वाली हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं, इस विशेष पर्व को मनाने के लिए रायपुर पहुंचीं। उन्होंने राजा शक्ति राज और उनके परिवार के साथ गुरुद्वारे में मत्था टेका।
जसमेर कौर ने कहा, “गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि हमें समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को हमेशा याद रखना चाहिए। उनकी शिक्षाएं हर परिस्थिति में हमें साहस और धैर्य का पाठ पढ़ाती हैं। रायपुर आकर इस पर्व को मनाने का अनुभव बहुत खास रहा।”
गुरुद्वारों में सेवा और लंगर का आयोजन
गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती के इस अवसर पर रायपुर के गुरुद्वारों में सेवा और लंगर का आयोजन किया गया। पंडरी गुरुद्वारे में शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए विशेष लंगर लगाया गया। बच्चों को कॉपी-किताबें और स्कूल बैग वितरित किए गए, जबकि दवाइयों का लंगर भी लगाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने निशुल्क दवाइयां प्राप्त कीं।
लंगर सेवा सिख धर्म की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जो समाज में समानता और सेवा का संदेश देती है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने लंगर सेवा में भाग लिया और दूसरों की मदद करने का संकल्प लिया।
गुरु गोविंद सिंह जी के उपदेश और उनका महत्व
गुरु गोविंद सिंह जी के उपदेश हर युग में प्रासंगिक हैं। उन्होंने प्रेम, भाईचारे, और साहस का संदेश दिया। उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण शिक्षा है कि हमें अन्याय के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और धर्म और सत्य की रक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर यह सिखाया कि हर व्यक्ति में साहस और नेतृत्व क्षमता होनी चाहिए। उनके आदर्श हमें जीवन में हर कठिनाई का सामना करने की शक्ति देते हैं।
श्रद्धालुओं की भावनाएं
गुरुद्वारों में पहुंचे श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन और उनके बलिदान हमें अपने जीवन में सच्चाई और धर्म के प्रति समर्पण का महत्व सिखाते हैं। उन्होंने कहा, “आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने गुरु के दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए और समाज में प्रेम और सेवा का संदेश फैलाना चाहिए।”
राजा शक्ति राज और जसमेर कौर का संदेश
राजा शक्ति राज ने कहा, “गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चाई और धर्म के लिए खड़े रहना कितना महत्वपूर्ण है। उनकी शिक्षाएं हमें हर स्थिति में प्रेरणा देती हैं।”
जसमेर कौर वालिया ने कहा, “गुरु गोविंद सिंह जी के आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि हमें अपने जीवन में समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह पर्व उनके उपदेशों को याद करने और उन्हें अपने जीवन में लागू करने का अवसर है।”
निष्कर्ष
गुरु गोविंद सिंह जयंती न केवल सिख समुदाय के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का पर्व है। रायपुर में इस पर्व को भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया गया। राजा शक्ति राज और जसमेर कौर वालिया जैसे व्यक्तित्वों ने इस पर्व में भाग लेकर यह संदेश दिया कि गुरु गोविंद सिंह जी के आदर्श आज भी हमारे जीवन को सही दिशा देने का मार्गदर्शक हैं।
गुरु गोविंद सिंह जी की शिक्षाएं हमें सच्चाई, साहस, और सेवा का महत्व सिखाती हैं। इस प्रकाश पर्व के माध्यम से उनके उपदेशों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
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